रायपुर/बिलासपुर (छत्तीसगढ़): छत्तीसगढ़ में शराब की लत एक खतरनाक मोड़ ले चुकी है। प्रदेश में हर माह औसतन 40 से अधिक युवाओं की मौत शराब के कारण लीवर फेल (सिरोसिस) और अन्य संबंधित गंभीर बीमारियों से हो रही है। यह जानकारी स्वास्थ्य विभाग के आधिकारिक आंकड़ों और प्रमुख अस्पतालों के विशेषज्ञों द्वारा सामने आई है, जिसे 'छत्तीसगढ़ टॉप टेन' की श्रेणी में रखा गया है।
★जन-स्वास्थ्य पर बड़ा सवाल!
★अस्पतालों में बढ़ रही है मरीजों की संख्या
अस्पतालों में भर्ती: रायपुर और बिलासपुर के बड़े सरकारी अस्पतालों (एम्स) में एल्कोहॉलिक हेपेटाइटिस (शराब से होने वाली लीवर की सूजन) के मरीजों की संख्या में तेजी से वृद्धि दर्ज की गई है।
युवा प्रभावित: लीवर फेल के कारण मरने वालों में 60 वर्ष से कम आयु के युवा मरीजों की संख्या काफी ज्यादा है, जो दर्शाता है कि शराब की लत किस तरह युवा पीढ़ी को अपनी चपेट में ले रही है।
रिकॉर्ड: अकेले रायपुर के एक बड़े सरकारी अस्पताल में हर माह लगभग 1200 से अधिक मरीज सिर्फ पेट और लीवर से जुड़ी बीमारियों के लिए भर्ती हो रहे हैं, जिनमें से 50 से 60 मरीज एल्कोहॉलिक हेपेटाइटिस के होते हैं।
★विशेषज्ञ की चेतावनी और इलाज की चुनौती
ट्रांसप्लांट विशेषज्ञ डॉ. योगेश बहालवाल, प्रोफेसर एवं हेड, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, अपोलो सिम्स अस्पताल, बिलासपुर के अनुसार, शराब लीवर को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाती है।
गंभीरता: उन्होंने बताया कि शराब लीवर में सूजन (हेपेटाइटिस) पैदा करती है, जो धीरे-धीरे सिरोसिस (लीवर का सिकुड़ना) में बदल जाता है। यह सिरोसिस ही मरीज की मौत का मुख्य कारण बनती है।
उपचार: सिरोसिस के गंभीर चरण में इलाज बहुत कठिन हो जाता है। इसका एकमात्र प्रभावी विकल्प लीवर ट्रांसप्लांट है, जिसकी लागत 18 से 20 लाख रुपये तक आती है, जो आम आदमी की पहुँच से बाहर है
★केस स्टडी: शराब से बिगड़ी जिंदगी
समाचार पत्र ने दो गंभीर मामलों का उल्लेख किया है जो इस भयावह स्थिति की पुष्टि करते हैं:
केस 01 (45 वर्षीय व्यक्ति): इन्हें पेट दर्द और लगातार उल्टी की शिकायत के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया। सिटी स्कैन में लीवर सिरोसिस पूरी तरह खराब पाया गया। डायग्नोसिस के बाद पेट में पानी भरने (एसाइटिस) की स्थिति बनी, और दुर्भाग्यवश इलाज के बाद इनकी मौत हो गई।
केस 02 (34 वर्षीय युवक): इस युवक को भी पेट दर्द और उल्टी होने के बाद अस्पताल लाया गया। शराब की भारी लत के कारण 21 दिनों तक इलाज चलने के बावजूद भी लीवर को बचाया नहीं जा सका। इलाज के दौरान, युवक के फेफड़ों में पानी भर गया और उनकी भी दुःखद मृत्यु हो गई।
★रोकथाम ही एकमात्र समाधान
विशेषज्ञों का स्पष्ट मत है कि शराब से होने वाले इस नुकसान से बचने का सबसे अच्छा तरीका है शराब का सेवन पूरी तरह से रोकना। सरकार और समाज को मिलकर इस दिशा में जागरूकता फैलानी होगी, ताकि प्रदेश के युवाओं को समय रहते इस जानलेवा लत से बचाया जा सके।
★शराब की लत छुड़ाने के लिए घरेलू उपाय
चूंकि सरकारी स्तर पर रोक-थाम की गति धीमी है, ऐसे में परिवारों और समाज को व्यक्तिगत स्तर पर पहल करनी होगी। यहां कुछ सरल घरेलू उपाय दिए जा रहे हैं जो शराब पीने की इच्छा को कम करने में मदद कर सकते हैं, हालांकि गंभीर लत के लिए हमेशा डॉक्टर या नशामुक्ति केंद्र की सलाह लेना आवश्यक है:
★फल और खाद्य पदार्थ
किशमिश और खजूर: जब भी शराब पीने की तीव्र इच्छा हो, तब 4-5 किशमिश खाएं या खजूर का सेवन करें। खजूर को कद्दूकस करके पानी में मिलाकर दिन में 2-3 बार पीने से भी मदद मिल सकती है।
सेब/गाजर का जूस: नियमित रूप से सेब या गाजर का जूस पीने से शराब की लत छोड़ने में सहायता मिलती है। भोजन के बाद एक सेब खाना भी फायदेमंद हो सकता है।
करेले का रस: करेले के पत्तों का रस पीने से शरीर से विषैले पदार्थ बाहर निकलते हैं और शराब पीने की इच्छा कम होती है।
★अन्य प्राकृतिक उपाय
अजवाइन का पानी: 500 ग्राम अजवाइन को 8 लीटर पानी में दो दिन के लिए भिगो दें (हो सके तो मिट्टी के बर्तन में)। इस पानी का सेवन करने से लत पर काबू पाने में मदद मिल सकती है।
इलायची और लौंग: 2 इलायची और 1 लौंग को मुंह में लेकर चबाने से शराब की तलब घटती है।
योग और ध्यान: योग (Yoga) और ध्यान (Meditation) तनाव को कम करने और आत्म-नियंत्रण बढ़ाने में सहायक होते हैं, जो शराब की लत से लड़ने में महत्वपूर्ण हैं।
★जीवनशैली में बदलाव
प्रेरणा और दूरी: उन दोस्तों और स्थानों से दूरी बनाएं जो शराब पीने के लिए प्रेरित करते हैं। अपने परिवार, खासकर बच्चों के साथ अधिक समय बिताएं।
पर्याप्त नींद: रोज़ाना 6 से 8 घंटे की गहरी नींद लें।
पानी का सेवन: शरीर को हाइड्रेटेड रखने और विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने के लिए खूब पानी पिएं।
यह स्पष्ट है कि राजस्व और जन-स्वास्थ्य के बीच एक बड़ी खाई है, जिसे पाटने के लिए सरकारों को केवल शराब दुकानों की संख्या बढ़ाने के बजाय, नशामुक्ति और स्वास्थ्य सेवाओं में अधिक निवेश करना होगा।





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