रायपुर: छत्तीसगढ़ सरकार के लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा जारी एक अनोखे सरकारी आदेश ने शिक्षकों में भारी नाराज़गी और बवाल पैदा कर दिया है। इस आदेश के तहत अब स्कूल के शिक्षकों को अपने शिक्षण कार्यों के साथ-साथ स्कूलों के आसपास घूमने वाले आवारा कुत्तों पर भी नज़र रखनी होगी।
★सरकारी आदेश के मुख्य बिंदु
- लोक शिक्षण संचालनालय ने सभी जिलों के संयुक्त निदेशकों (जेडी) और जिला शिक्षा अधिकारियों (डीईओ) को इस संबंध में निर्देश जारी किए हैं।
- प्रत्येक स्कूल में एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने का आदेश दिया गया है।
- शिक्षकों को स्कूल परिसर या उसके आसपास घूमने वाले आवारा कुत्तों की जानकारी ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत या नगर निगम के डॉग कैचर को देनी होगी।
- स्थानीय प्रशासन की मदद से स्कूल में कुत्तों के प्रवेश को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
★टीचर्स एसोसिएशन ने जताया विरोध
छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन जिला इकाई ने इस आदेश को पूरी तरह से अव्यावहारिक और शिक्षकीय गरिमा के विरुद्ध बताया है। एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष दिलीप साहू, प्रदेश संगठन सचिव बीरबल देशमुख, जिला संयोजक रामकिशोर खराशु कामता प्रसाद साहू, शिव शांडिल्य ,वीरेंद्र देवांगन, निलेश देशमुख, पवन जोशी, कांतू राम चंदेल, जिला सचिव नरेंद्र साहू सहित अन्य पदाधिकारियों ने संयुक्त रूप से इसका कड़ा विरोध दर्ज कराया है।
★कुत्तों की निगरानी जैसी गैर-शिक्षकीय जिम्मेदारी अनुचित
शिक्षकों का तर्क है कि उन पर पहले से ही कई गैर-शिक्षकीय कार्यों का बोझ है, ऐसे में आवारा कुत्तों की निगरानी जैसी नई जिम्मेदारी देना अनुचित है। एसोसिएशन का कहना है कि कुत्तों की निगरानी व नियंत्रण स्थानीय प्रशासन का काम है, जिसे शिक्षकों पर थोपना सही नहीं है। यह कदम स्कूलों में शिक्षण कार्य को पहले से ही बाधित कर रहा है और शिक्षक समुदाय की कार्य क्षमता को प्रभावित करता है।
★आदेश वापस नहीं लिया तो होगा आंदोलन
संगठन ने राज्य सरकार से इस आदेश को तत्काल वापस लेने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि यह निर्णय वापस नहीं लिया गया तो शिक्षक संगठन आंदोलन का रास्ता अपना सकते हैं। इधर, जिला स्तर पर नोडल अधिकारियों की सूची तैयार करने की प्रशासनिक तैयारी शुरू कर दी गई है।





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