कोरबा। पोड़ी उपरोड़ा ब्लॉक के अंतर्गत आदिवासी सेवा सहकारी समिति मर्यादित, मोरगा में करोड़ों रुपये के खाद घोटाले की चर्चा ने क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया है। किसानों ने आरोप लगाया है कि समिति प्रबंधक द्वारा बिना अनुमति और जानकारी के, किसानों के खातों में अनाधिकृत रूप से खाद की मात्रा चढ़ाकर अतिरिक्त ऋण दिखाया गया है, जिससे सैकड़ों किसान भारी कर्ज के बोझ तले दब गए हैं।
किसानों का कहना है कि खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 के दौरान समिति प्रबंधक महेंद्र शर्मा ने कई किसानों के नाम पर गैर-कानूनी तरीके से ऋण दर्ज किया। इतना ही नहीं, पिछले वर्ष 2023-24 में भी इसी तरह से किसानों के नाम पर फर्जी ऋण एवं अतिरिक्त खाद की राशि दर्ज की गई थी, जिसका भुगतान किसानों ने अपनी मेहनत की धान बेचकर किया था। बावजूद इसके, प्रबंधक द्वारा अब तक वह राशि किसानों के खातों में समायोजित नहीं की गई है।
किसानों ने बताया कि इन अनियमितताओं के कारण कई किसानों को बैंकों में कर्जदार घोषित कर दिया गया है, जबकि उन्होंने इतना खाद या ऋण कभी लिया ही नहीं।
कलेक्टर से शिकायत, तीन दिन में कार्रवाई की मांग
प्रभावित किसानों ने जिलाधीश कोरबा को ज्ञापन सौंपते हुए मांग की है कि—
1. किसानों के खातों में चढ़ाई गई अनाधिकृत खाद एवं ऋण राशि तत्काल हटाई जाए।
2. प्रबंधक द्वारा की गई वित्तीय अनियमितताओं की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए।
3. दोषी समिति प्रबंधक महेंद्र शर्मा को तीन दिनों के भीतर पद से हटाया जाए।
किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समयावधि में कार्रवाई नहीं होती है, तो सभी पंजीकृत किसान आदिवासी सेवा सहकारी समिति मोरगा के समक्ष अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन करेंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
ग्रामीणों में आक्रोश, पारदर्शिता की मांग
मोरगा, बांकछुआ, और आसपास के गांवों में इस घोटाले को लेकर काफी नाराजगी है। ग्रामीणों का कहना है कि यह सिर्फ किसानों के साथ अन्याय नहीं, बल्कि सहकारी प्रणाली में विश्वासघात है। अब सभी की निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं कि क्या इस मामले में त्वरित कार्रवाई होती है या नहीं।




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