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राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ पर देशव्यापी समारोह, CM साय ने किया सामूहिक गायन

 

रायपुर/नई दिल्ली: राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ की रचना के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में, आज पूरे देश में गर्व और उत्साह के साथ वर्ष भर चलने वाले भव्य स्मरणोत्सव का शुभारंभ किया गया। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने नई दिल्ली में इस राष्ट्रीय समारोह का उद्घाटन किया, जिसके साथ ही देश भर में सामूहिक ‘वंदे मातरम्’ गायन का आयोजन हुआ।

पूरे छत्तीसगढ़ में गुंजा राष्ट्रगीत

छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने राजधानी रायपुर के मंत्रालय (महानदी भवन) में वरिष्ठ अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ सामूहिक रूप से राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ का गायन किया। इस अवसर पर सभी ने ‘वंदे मातरम्’ के उद्घोष के साथ स्वतंत्रता आंदोलन की राष्ट्रीय चेतना को याद किया और देश के अमर बलिदानियों को नमन किया। मुख्यमंत्री श्री साय वर्चुअल माध्यम से नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय स्मरणोत्सव कार्यक्रम से भी जुड़े और प्रधानमंत्री श्री मोदी का प्रेरणादायक उद्बोधन सुना।

मुख्यमंत्री का संदेश: देशभक्ति की प्रबल प्रेरणा

मुख्यमंत्री श्री साय ने इस ऐतिहासिक अवसर पर प्रदेशवासियों को शुभकामनाएँ दीं और कहा कि ‘वंदे मातरम्’ मातृभूमि के प्रति अगाध प्रेम, कृतज्ञता और राष्ट्रधर्म की भावना का शाश्वत प्रतीक है। उन्होंने कहा कि बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित यह गीत स्वतंत्रता संग्राम के दौरान देशभक्ति की सबसे प्रबल प्रेरणा बना। अनेक क्रांतिकारियों ने इसी उद्घोष के साथ अपने प्राणों का उत्सर्ग किया। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि 1905 के बंगाल विभाजन के समय इस गीत ने स्वदेशी आंदोलन को नई ऊर्जा दी और यह पूरे देश में सांस्कृतिक एकता और राष्ट्रभक्ति का मंत्र बन गया।

प्रधानमंत्री ने बताया 'मातृभूमि की साधना'

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि ‘वंदे मातरम्’ माँ भारती की साधना और आराधना की प्रेरक अभिव्यक्ति है। उन्होंने इस गीत को भारत की शाश्वत संकल्पना, स्वतंत्र अस्तित्व-बोध और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक बताया। प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ भारत की आजादी का उद्घोष था, जिसने गुलामी की बेड़ियों को तोड़ने की प्रेरणा दी और यह केवल विरोध का स्वर नहीं, बल्कि आत्मबल जगाने वाला मंत्र भी बना।

यह स्मरणोत्सव कार्यक्रम भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के मार्गदर्शन में वर्ष भर चार चरणों में आयोजित किया जाएगा, जिसका उद्देश्य राष्ट्रगीत की भावना को नई पीढ़ी तक पहुँचाना और देश में राष्ट्रप्रेम की भावना को और प्रज्वलित करना है।