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एसआईआर में प्रेम विवाह करने वाली बहुओं का अधूरा ब्योरा प्रशासन के सामने बना चुनौती: लव मैरिज वाली विवाहिताओं को नहीं मिल रहा मायके का साथ

 


रायपुर : प्रेम विवाह (लव मैरिज) करने वाली कई विवाहित महिलाओं को स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तहत मतदाता सूची के पुनरीक्षण के लिए फॉर्म भरने में बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस प्रक्रिया के लिए जब वे अपने मायके (माता-पिता का घर) से ज़रूरी जानकारी मांगती हैं, तो नाराज परिजन सहयोग करने से इनकार कर रहे हैं, जिससे उनके फॉर्म अधूरे रह जा रहे हैं।

मुख्य बिंदु:
  • जानकारी देने से पीछे हट रहे परिजन: सर्वे के दौरान बड़ी संख्या में ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां मायके वालों ने अपनी ही बेटी से जुड़े ज़रूरी विवरण (जैसे 2002 की मतदाता सूची का विवरण) देने से इनकार कर दिया है। नाराजगी इतनी गहरी है कि कुछ परिवार बात तक नहीं करना चाहते।
  • भावनात्मक परीक्षा: जब बेटियां मायके वालों से जानकारी के लिए प्रयास कर रही हैं, तो कुछ परिवार तंज कसते हुए कह रहे हैं कि "अब क्यों याद किया?" यह सुनकर कई विवाहिताएं भावनात्मक रूप से टूट जाती हैं।
  • प्रशासन की अपील: जिला निर्वाचन अधिकारी मनीष बंसल ने इस प्रक्रिया को ज़रूरी बताया है और सभी से बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) का सहयोग करने की अपील की है, ताकि कोई भी पात्र महिला मतदाता सूची से न छूटे।
  • अन्य चुनौतियां: दूसरे जिलों से आई बहुओं का पूरा रिकॉर्ड जुटाना और भी कठिन है। आवश्यक दस्तावेज़ उपलब्ध न होने पर फॉर्म अधूरा छोड़ना पड़ रहा है।
यह स्थिति न केवल एसआईआर प्रक्रिया पर असर डाल रही है, बल्कि समाज में अभी भी बनी मानसिकता और मायके-ससुराल के बीच बढ़ती दूरी को भी उजागर कर रही है।
एसआईआर प्रक्रिया:
एसआईआर भारत निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूची को त्रुटि मुक्त और अद्यतित करने के लिए एक व्यापक सत्यापन प्रक्रिया है। इसमें बीएलओ घर-घर जाकर गणना प्रपत्र भरवाते हैं, जिसमें मतदाताओं को 2002 की मतदाता सूची से संबंधित अपने या अपने माता-पिता/दादा-दादी के विवरण देने होते हैं।
SIR की आवश्यकता क्यों:
त्रुटि-मुक्त सूची: मतदाता सूची से मृत, स्थानांतरित और डुप्लीकेट मतदाताओं के नामों को हटाकर सटीकता सुनिश्चित करना।
योग्य नागरिकों को जोड़ना: 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके या नए स्थानों पर रहने वाले सभी पात्र भारतीय नागरिकों को मतदाता सूची में शामिल करना।
चुनावी अखंडता बनाए रखना: "एक व्यक्ति, एक वोट" के सिद्धांत को मजबूत करना और चुनावी कदाचार को रोकना। 
हालांकि, इस प्रक्रिया के तहत घर-घर जाकर सत्यापन होता है और नागरिकों से दस्तावेजी प्रमाण (जैसे जन्म प्रमाण पत्र) मांगे जाते हैं। कुछ समाचार रिपोर्टों और राजनीतिक चर्चाओं में यह उल्लेख किया गया है कि पश्चिम बंगाल और बिहार जैसे सीमावर्ती राज्यों में SIR प्रक्रिया शुरू होने के बाद कुछ जगहों पर अवैध अप्रवासियों में खलबली मच गई और कुछ लोग डर के मारे सीमा पार कर वापस चले गए। 
चुनाव आयोग का रुख स्पष्ट है कि इसका उद्देश्य केवल पात्र भारतीय नागरिकों को शामिल करना और अपात्र व्यक्तियों (जिनमें विदेशी नागरिक भी शामिल हो सकते हैं) को बाहर करना है। यह प्रक्रिया सभी निवासियों के लिए एक समान है, चाहे उनका मूल स्थान कुछ भी हो।