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कोण्डागांव में आवारा कुत्तों का रैबीज टीकाकरण जारी, नपा और पशुविभाग की संयुक्त कार्यवाही

 


कोण्डागांव: कोण्डागांव नगर पालिका अधिकारी दिनेश डे ने जानकारी देते हुए बताया कि नगरपालिका कर्मचारियों द्वारा कोण्डागांव नगर अंतर्गत आवारा कुत्तों को पकड़कर एंटी रेबीज वैक्सीन लगाई जा रही है। ताकि आवारा कुत्तों के काटने से होने वाले रैबीज से,आवारा घूम रहे पशुओं, और बच्चों, बूढों लोगों को बचाया जा सके।

टीकाकरण की आवश्यकता: आवारा कुत्तों को एंटी-रेबीज वैक्सीन लगाना एक अत्यंत महत्वपूर्ण और जीवन रक्षक पहल है, जिसके कई व्यापक लाभ हैं। यह न केवल जानवरों की सुरक्षा करता है बल्कि समुदाय के स्वास्थ्य के लिए भी आवश्यक है, क्योंकि रेबीज एक 100% घातक बीमारी है, जिसका एक बार लक्षण दिखने पर कोई इलाज नहीं है।

प्रमुख कारक: आवारा कुत्तों के काटने का मामला लगातार बढ़ने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में संज्ञान लिया और आदेश जारी किया था। राज्य शासन ने इसका पालन करते हुए नगरपालिका परिषदों को आवारा कुत्तों के रेबीज टीकाकरण का निर्देश दिया है।

तत्काल कार्यवाही: इसी के परिपालन में नगरपालिका अधिकारी दिनेश डे के मार्गदर्शन में नगरपालिका की टीम और पशु विभाग की संयुक्त टीम ने कार्यवाही शुरू की।

स्कूल को गाइड लाइन: अब स्कूलों में घूम रहे आवारा कुत्तों के बारे में टीचरों को ग्राम पंचायत में देनी होगी जानकारी 

कार्य प्रगति: अब तक 22 कुत्तों को रैबीज का टीका लगाया जा चुका है, और यह अभियान निरंतर जारी रहेगा।

टीकाकरण के मुख्य लाभ:
  • मानव जीवन की सुरक्षा: रेबीज मुख्य रूप से संक्रमित कुत्तों के काटने से मनुष्यों में फैलता है। भारत में रेबीज से होने वाली 96% मौतें कुत्तों के काटने से होती हैं। आवारा कुत्तों का टीकाकरण सीधे तौर पर मानव मृत्यु दर को कम करता है।
  • सामुदायिक या हर्ड इम्युनिटी (Herd Immunity): जब कुत्तों की बड़ी आबादी (लगभग 70% या अधिक) का टीकाकरण किया जाता है, तो उनमें हर्ड इम्युनिटी विकसित हो जाती है। इससे बीमारी का संचरण चक्र टूट जाता है और असंक्रमित कुत्तों में भी बीमारी फैलने का जोखिम कम हो जाता है।
  • कानूनी और सार्वजनिक स्वास्थ्य अनिवार्यता: रेबीज टीकाकरण अधिकांश स्थानों पर कानून द्वारा आवश्यक है क्योंकि यह एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य खतरा है। सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले में संज्ञान लिया था और आवारा कुत्तों के टीकाकरण का आदेश जारी किया था, जिसका पालन राज्य सरकारें और स्थानीय निकाय कर रहे हैं।
  • पशु कल्याण: टीकाकरण आवारा कुत्तों को इस घातक वायरस से बचाता है, जिससे उन्हें दर्दनाक लक्षणों और मृत्यु से बचाया जा सकता है।
  • भय और चिंता में कमी: आवारा कुत्तों के काटने के मामले लगातार बढ़ने से लोगों में डर पैदा होता है। टीकाकरण अभियान से समुदाय में सुरक्षा की भावना बढ़ती है और लोग कम चिंतित महसूस करते हैं।
गोवा ने बड़े पैमाने पर टीकाकरण अभियान, शिक्षा और निगरानी के माध्यम से 2018 से रेबीज को सफलतापूर्वक खत्म करके एक उदाहरण स्थापित किया है। कोण्डागांव की यह पहल भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।