Ticker

6/recent/ticker-posts

Ad Code

मजदूर कल्याण अभियान में रोड़ा बनी 'सरपंच की दादागिरी'

 


पीथमपुर में विकास कार्य ठप; सरपंच पर लगा 'कमीशनखोरी' और झूठी शिकायत का गंभीर आरोप

जांजगीर-चांपा/पीथमपुर। छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले की ग्राम पंचायत पीथमपुर इन दिनों स्थानीय सरपंच और एक पंजीकृत मजदूर संगठन के बीच जारी गतिरोध के कारण सुर्खियों में है। यह विवाद अब श्रमिक कल्याण और ग्राम विकास में भारी अवरोध पैदा करने के आरोपों तक पहुँच गया है। छत्तीसगढ़ मजदूर शक्ति संघ ने सरपंच श्रीमती रूपांजली धर्मेंद उदासी और उनके पति के विरुद्ध कलेक्टर को एक विस्तृत शिकायत सौंपकर तत्काल FIR दर्ज करने और उच्च-स्तरीय जांच की मांग की है।

श्रमिक कल्याण अभियान बाधित

​छत्तीसगढ़ मजदूर शक्ति संघ (पंजीकरण क्र. 116466) का पूरे प्रदेश में 'सदस्यता अभियान एवं श्रमिक सहायता शिविर 2025-26' चला रहा है, जिसका उद्देश्य श्रमिकों को संगठित कर सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाना है। संघ का आरोप है कि पीथमपुर की सरपंच श्रीमती रूपांजली धर्मेंद उदासी और उनके पति इस अभियान का सक्रिय विरोध कर रहे हैं।

​संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि सरपंच ने न केवल शिविर लगाने से मना किया, बल्कि संघ के वैध सदस्यता शुल्क (₹10 प्रवेश शुल्क, एवं 20 रु. मासिक के हिसाब से वार्षिक सदस्यता 240, एवं संघ द्वारा निर्धारित परिचय पत्र शुल्क 50 रु. कुल 300 रु.) को 'अवैध वसूली' बताकर ग्रामीणों और श्रमिकों को गुमराह किया। संघ के पदाधिकारी  रवि चंदेलिया के साथ दुर्व्यवहार भी किया गया और बाद में उन्हीं के नाम पर श्रम विभाग एवं कलेक्टर कार्यालय में तथ्यों को छिपाकर एक झूठी शिकायत (दिनांक 10/11/2025) भी दर्ज करा दी गई।

ग्राम विकास ठप: पंचायत पर 'दादागिरी' का आरोप

​संघ ने अपनी शिकायत में ग्रामीणों द्वारा व्यक्त की गई पीड़ा को प्रमुखता से उजागर किया है, जिससे यह विवाद निजी न रहकर सार्वजनिक हित का मामला बन गया है।

  • स्थानीय श्रमिकों ने बताया कि सरपंच की 'दादागिरी' और उप-सरपंच एवं पंचों के साथ समन्वय की कमी के कारण ग्राम पंचायत में विकास कार्य पूरी तरह ठप है।
  • प्रशासनिक लापरवाही ऐसी है कि पंचायत कार्यालय अधिकांश समय बंद रहता है, जिससे ग्रामीण मूलभूत सुविधाओं के अभाव में जी रहे हैं।
  • योजनाओं से वंचित: मनरेगा के तहत स्थानीय श्रमिकों को रोजगार नहीं मिल रहा है। इसके अलावा, प्रधानमंत्री आवास योजना और शौचालय निर्माण जैसी महत्वपूर्ण सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने में भी अनदेखी की जा रही है।
  • कमीशनखोरी का आरोप: ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि निर्माण कार्यों को शुरू करने से पहले ही सरपंच द्वारा अपना कमीशन तय कर लिया जाता है, जिससे काम शुरू ही नहीं हो पाते। 15वें और 16वें वित्तीय आयोग की राशि खाते में होने के बावजूद उपयोग नहीं हो पा रहा है।

कड़ी कार्यवाही की माँग

​छत्तीसगढ़ मजदूर शक्ति संघ ने अपनी अपील में कलेक्टर से न केवल संघ के विरुद्ध दर्ज झूठी शिकायत पर विचार करने का आग्रह किया है, बल्कि सरकारी योजनाओं में बाधा डालने, भ्रष्टाचार, एवं पद के दुरुपयोग के लिए सरपंच और उनके पति के विरुद्ध तत्काल कड़ी कानूनी कार्यवाही और FIR दर्ज करने की माँग की है। संघ ने कहा है कि जब तक यह गतिरोध समाप्त नहीं होता, तब तक पीथमपुर के श्रमिक और ग्रामीण सरकारी योजनाओं से वंचित होते रहेंगे।

​जनहित से जुड़े इस गंभीर मामले पर प्रशासन का रुख क्या होगा, यह देखना बाकी है।