राजनांदगांव, 8 दिसंबर 2025
राजनांदगांव जिले में उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम के तहत आयोजित बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मक मूल्यांकन परीक्षा केवल एक औपचारिकता बनकर रह गई है। परीक्षा केंद्रों पर असाक्षर लोगों की जगह स्कूली बच्चों द्वारा पर्चे भरे जाने के मामले सामने आए हैं।
इस साक्षरता कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य 14 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के ऐसे असाक्षर लोगों को साक्षर बनाना था, जिन्होंने कभी स्कूली शिक्षा ग्रहण नहीं की। लेकिन परीक्षा के दौरान, 10वीं और 11वीं कक्षा के छात्र-छात्राएं दादा-दादी और नाना-नानी के नाम पर प्रश्न पत्र हल करते नजर आए।
राजनांदगांव शहर के पास शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला में भी कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला। यहां 22 असाक्षर लोगों का पंजीकरण किया गया था, जिनमें से एक के देहावसान के बाद 21 परीक्षार्थियों को परीक्षा देनी थी। हैरानी की बात यह है कि परीक्षा केंद्र में 21 प्रश्न पत्रों को नौवीं, दसवीं और ग्यारहवीं के विद्यार्थी एक साथ बैठकर हल कर रहे थे।
मामले के तूल पकड़ने पर, स्कूल प्रबंधन ने आनन-फानन में गांव की कुछ बुजुर्ग महिलाओं को परीक्षा देने के लिए बुला लिया। इन महिलाओं को यह तक नहीं पता था कि वे परीक्षा क्यों दे रही हैं, और उनमें से कई तो अक्षर ज्ञान से भी वंचित थीं। नियमों के अनुसार 120 घंटे की पढ़ाई अनिवार्य थी, लेकिन इन महिलाओं को पढ़ाया भी नहीं गया था।
गठुला के एक अन्य परीक्षा केंद्र में तो हद हो गई, जहां एक 12वीं पास बहू अपनी सास की जगह स्वयं परीक्षा देने पहुंच गई। परीक्षा में शामिल अधिकांश महिलाएं पढ़ने में असमर्थ थीं। शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला गठुला के प्रधान पाठक ने बताया कि पिछले वर्ष के बचे हुए 22 परीक्षार्थियों को इस वर्ष परीक्षा दिलाई जा रही है।
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News Reporter
Sunil Ratnakar
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Makdi kondagaov cg.





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