माकड़ी,कोण्डागांव [19/12/2025]:
छत्तीसगढ़ के महान संत और समाज सुधारक बाबा गुरु घासीदास जी की 266वीं जयंती माकड़ी में हर्षोल्लास, भक्ति और धूमधाम के साथ मनाई गई। इस पावन अवसर पर सामाजिक भाइयों और बहनों के साथ-साथ स्थानीय कार्यकर्ताओं में सुबह से ही खुशी की लहर थी, और सभी कार्यक्रम की तैयारियों में उत्साहपूर्वक जुटे हुए थे। बाबा जी के अनुयायियों ने उनकी शिक्षाओं को याद किया, जिन्होंने समाज को सत्य, अहिंसा और समानता का मार्ग दिखाया।
छत्तीसगढ़ के महान संत और समाज सुधारक बाबा गुरु घासीदास जी की 266वीं जयंती माकड़ी में हर्षोल्लास, भक्ति और धूमधाम के साथ मनाई गई। इस पावन अवसर पर सामाजिक भाइयों और बहनों के साथ-साथ स्थानीय कार्यकर्ताओं में सुबह से ही खुशी की लहर थी, और सभी कार्यक्रम की तैयारियों में उत्साहपूर्वक जुटे हुए थे। बाबा जी के अनुयायियों ने उनकी शिक्षाओं को याद किया, जिन्होंने समाज को सत्य, अहिंसा और समानता का मार्ग दिखाया।
भव्य आयोजन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां
जयंती समारोह की शुरुआत सुबह प्रभात फेरी के साथ हुई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया और गुरु घासीदास के संदेशों का जयघोष किया। दिन भर चले विविध आयोजनों के क्रम में, कन्या छात्रावास की छोटी बच्चियों द्वारा बहुत ही सुंदर और मनमोहक पंथी नृत्य की प्रस्तुति दी गई। इन प्रस्तुतियों ने दर्शकों का मन मोह लिया और बाबा जी के संदेशों को कलात्मक ढंग से सभी तक पहुंचाया। कार्यक्रम स्थल को भव्य रूप से सजाया गया था और पूरे माहौल में भक्तिमय ऊर्जा का संचार हो रहा था।
बाबा के अमर संदेशों का स्मरण
इस अवसर पर आयोजित धर्मसभा में वक्ताओं ने बाबा गुरु घासीदास के जीवन दर्शन और उनके द्वारा दिए गए "मनखे-मनखे एक समान" के अमर संदेश पर विस्तार से प्रकाश डाला। बाबा जी ने अपना पूरा जीवन समाज कल्याण के लिए समर्पित कर दिया, उन्होंने जातिगत भेदभाव, छुआछूत, मूर्ति पूजा और पशु बलि जैसी सामाजिक बुराइयों का कड़ा विरोध किया।
उनके प्रमुख उपदेशों में से कुछ निम्नलिखित हैं:
- सत्य ही मानव का आभूषण है: उन्होंने सत्य को ईश्वर के समान बताया और कहा कि सत्य के मार्ग पर चलना ही सबसे बड़ा धर्म है।
- जीवों पर दया करें: बाबा जी ने सभी प्राणियों के प्रति दया और अहिंसा का संदेश दिया।
- नशाखोरी से दूर रहें: उन्होंने नशा को सामाजिक बुराई माना और उससे दूर रहने की प्रेरणा दी।
- नारी का सम्मान करें: उन्होंने महिलाओं को समाज में समान अधिकार और सम्मान देने की बात कही।
इन शिक्षाओं ने सदियों से शोषित और वंचित समुदायों को एक नई पहचान और दिशा दी है।
संध्या बेला में सामूहिक नृत्य करते हुए सामाजिक कार्यकर्ता








Social Plugin