सूरजपुर, छत्तीसगढ़। 20नवंबर 2025
छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में एक अत्यंत हृदय विदारक घटना सामने आई है, जहाँ सुरहा नाला में डूबने से दो मासूम बच्चियों की मौत हो गई। यह घटना जिले के चाँदनी बिहारपुर के नवरगई गाँव की बताई जा रही है। इस दर्दनाक हादसे के बाद पूरे गाँव में मातम पसर गया है, और पीड़ित परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है।
★घटना का विवरण
मृतक बच्चियों की पहचान 6 वर्षीय पूनम और 4 वर्षीय उर्मिला के रूप में हुई है, जो नवरगई निवासी हैं।
जानकारी के अनुसार, दोनों बहनें बुधवार को अपने घर से आँगनबाड़ी जाने के लिए निकली थीं। रास्ते में, वे सुरहा नाले के किनारे अमरूद खाने के लालच में चली गईं। इसी दौरान खेलते-खेलते या असावधानीवश, दोनों बहनें नाले के गहरे पानी में चली गईं और डूब गईं।
★प्रशासन का रुख
स्थानीय लोगों द्वारा घटना की जानकारी दिए जाने के बाद, पुलिस तुरंत मौके पर पहुँची। दोनों बच्चियों के शव नाले से निकाले गए। पुलिस ने मामले की जाँच शुरू कर दी है और आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा रही है। इस घटना से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है, और ग्रामीण परिवारों की सुरक्षा को लेकर चिंता व्यक्त कर रहे हैं।
★बच्चों की सुरक्षा: आँगनबाड़ी/स्कूल छोड़ते समय अभिभावकों के लिए महत्वपूर्ण सुझाव
बच्चों को आँगनबाड़ी या स्कूल भेजते समय उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। रास्ते में होने वाली संभावित दुर्घटनाओं और खतरों से बचने के लिए निम्न बिंदुओं पर विचार करें:
★व्यक्तिगत पर्यवेक्षण की अनिवार्यता
स्वयं छोड़ने और लाने की व्यवस्था: यदि संभव हो, तो माता-पिता या परिवार का कोई जिम्मेदार सदस्य बच्चे को स्वयं आँगनबाड़ी/स्कूल छोड़ने जाए और छुट्टी के बाद उन्हें लेने भी जाए। यह सबसे सुरक्षित उपाय है।
निश्चित रूट का इस्तेमाल: बच्चों को हमेशा सबसे छोटे, सबसे सुरक्षित और सबसे अधिक रोशनी वाले रूट से ही ले जाएं, भले ही वह थोड़ा भीड़भाड़ वाला क्यों न हो।
सहायिका या विश्वसनीय व्यक्ति के साथ भेजना: यदि आप स्वयं नहीं जा सकते हैं, तो एक विश्वसनीय सहायिका (दाई/मेड) या किसी अन्य परिवार के जिम्मेदार सदस्य को ही बच्चे के साथ भेजें, जिसे आपने पूरी जिम्मेदारी सौंपी हो।
★समूह और सुरक्षा दल
'सुरक्षा मित्र' समूह बनाएं: अपने पड़ोस के अन्य अभिभावकों के साथ मिलकर एक छोटा समूह बनाएं। इस समूह में शामिल बच्चे और अभिभावक मिलकर एक साथ स्कूल/आँगनबाड़ी जाएं। सामूहिक उपस्थिति अनचाही घटनाओं को रोकने में सहायक होती है।
सहायिका का पहचान पत्र: सहायिका/दाई को भेजते समय, सुनिश्चित करें कि उनके पास आपका अधिकृत पहचान पत्र या स्कूल/आँगनबाड़ी द्वारा जारी किया गया पास हो, ताकि किसी भी भ्रम की स्थिति न हो।
★रास्ते के खतरों के बारे में जागरूकता
खतरों की पहचान कराएं: अपने बच्चे को रास्ते में आने वाले संभावित खतरों जैसे— आवारा कुत्ते,गहरे गड्ढे, खुले नाले, निर्माण कार्य वाली जगहें, या तेज बहते पानी के पास खेलने से होने वाले जोखिमों के बारे में स्पष्ट रूप से समझाएं।
अपरिचित लोगों से दूरी: बच्चों को सिखाएं कि वे रास्ते में किसी भी अपरिचित व्यक्ति से बात न करें, उनसे खाने की कोई चीज न लें, और किसी भी स्थिति में उनकी गाड़ी में न बैठें। उन्हें सिखाएं कि खतरे की स्थिति में वे जोर से मदद के लिए चिल्लाएं।
'नहीं' कहना सिखाएं: बच्चों को सिखाएं कि अगर उन्हें कोई भी चीज असहज महसूस कराती है, तो वे स्पष्ट रूप से 'नहीं' कहें और तुरंत अपने अभिभावक को बताएं।
★आपातकालीन तैयारी
आपातकालीन संपर्क सूची: स्कूल/आँगनबाड़ी को हमेशा अपने आपातकालीन संपर्क नंबरों की अद्यतन सूची दें, और सुनिश्चित करें कि वे जानते हैं कि किस स्थिति में किसे कॉल करना है।
पहचान की जानकारी: छोटे बच्चों के कपड़ों या बैग में एक छोटा टैग लगा दें, जिसमें उनका नाम और आपका फोन नंबर हो, ताकि अनहोनी की स्थिति में उनकी पहचान आसानी से की जा सके।
यह सुनिश्चित करना कि बच्चों को सुरक्षित रूप से उनके गंतव्य तक पहुँचाया जाए, उनकी शिक्षा और विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।





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